आज लोन लेना बहुत आसान है। क्या आप जानते हैं कि आसानी से मिलने वाले लोन अब लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है?
रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा कि अधिकांश लोग पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इन्हें अनसिक्योर्ड लोन कहा जाता है क्योंकि वे बिना किसी गारंटी या गिरवी के मिलते हैं। ये लोन अब सबसे अधिक “रिस्की” हो चुके हैं।
सबसे खराब लोन कौन सा है?
आप गलत हैं अगर आप मानते हैं कि होम लोन या गोल्ड लोन सबसे खतरनाक हैं।
आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड सबसे अधिक डिफॉल्ट (यानि चुका नहीं पाने वाले) लोन हैं।
इन लोन में संपत्ति गिरवी नहीं रखा जाता। इसलिए बैंक सुरक्षित नहीं है। बैंक को बहुत नुकसान होगा अगर ग्राहक पैसा नहीं देता।
25 वर्ष से कम उम्र वाले सबसे अधिक डिफॉल्टर
रिपोर्ट में चौंकाने वाला पता चला कि सबसे अधिक डिफॉल्टर 25 साल से कम उम्र के युवा हैं।
वे आसानी से पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड ले लेते हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं करते।
युवा लोगों के सिर पर कर्ज बढ़ रहा है, क्योंकि वे क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते हैं, महंगे फोन या उपकरण खरीदते हैं, और खर्च करने के बाद बिल की चिंता नहीं करते।
क्रेडिट कार्ड का बकाया दिसंबर 2025 तक 2.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
यानी लाखों लोगों पर कर्ज है।
बैंकों का जोखिम बढ़ा, मुनाफा भी बढ़ा
अब सवाल उठता है कि बैंक इतनी जल्दी ऐसे लोन क्यों दे रहे हैं?
कारण स्पष्ट है— इन लोन पर ब्याज दर बहुत अधिक है।
होम लोन या गोल्ड लोन पर ब्याज 8-10% होता है, जबकि पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड पर ब्याज 12–42% होता है।
यह बैंक को बड़ा लाभ देता है।
ब्याज अधिक होता है।
इसलिए बैंक और फिनटेक कंपनियां बिना गारंटी के लोन देती हैं।
आरबीआई की चेतावनी: अनसिक्योर्ड लोन में वृद्धि
आरबीआई की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि अनसिक्योर्ड लोन का कुल डिफॉल्ट हिस्सा 53.1% हो गया है।
यानी अधिकांश लोन केसों में री-पेमेंट मुश्किल है।
इन लोनों का हिस्सा प्राइवेट बैंकों के कुल डिफॉल्ट का 76% है।
ये आंकड़ा सिर्फ 15.9% सरकारी बैंकों में है।
प्राइवेट बैंक स्पष्ट रूप से अधिक जोखिम उठाते हैं।
फिनटेक ऐप्स सेकंडों में अप्रूवल देते हैं, इसलिए यह अक्सर ग्राहक की हैसियत से अधिक लोन देता है।
फिनटेक एप्लिकेशन और लोन जाल
Fintech: मोबाइल ऐप्स के माध्यम से लोन देने वाली कंपनियां
इनकी वजह से लोन लेना अब बहुत आसान हो गया है: बस कुछ क्लिक करें, और पैसे आपके अकाउंट में आ जाएंगे।
लेकिन अब लोन जाल ऐसा ही है।
आरबीआई ने कहा कि फिनटेक लेंडर्स की कुल लोन बुक में अनसिक्योर्ड लोन का 70% से अधिक हिस्सा है।
इनमें से अधिकांश लोन 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों को दिए गए हैं।
युवा अक्सर चार-पांच कंपनियों से लोन लेते हैं, और जब पैसा चुकाना होता है तो दबाव बढ़ जाता है।
आरबीआई ने कहा कि ऐसे लोगों पर सबसे अधिक “रीपेमेंट प्रेशर” रहता है।
10 हजार रुपये के लोन में सबसे अधिक भुगतानकर्ता
रिपोर्ट के अनुसार, 10,000 रुपये से कम की लोन की डिफॉल्ट दर सबसे अधिक है।
लोगों को आसानी से छोटे लोन मिलते हैं और वे सोचते हैं कि वे “बाद में चुका देंगे”, लेकिन यह विचार मुश्किल में फंस जाता है।
नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पर्सनल लोन में 90 दिन से अधिक अवधि वाले लोन का हिस्सा 3.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
यानि, हर सौ लोन में से तीन से चार लोन का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है।
तेजी से क्रेडिट कार्ड का उपयोग
भारत में क्रेडिट कार्ड का बाजार बहुत तेजी से विकसित हुआ है।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार:
- 2023 में लगभग नौ से दस करोड़ कार्ड थे।
- 2025 की शुरुआत तक यह 10.88 करोड़ हो गया था।
- तीन वर्षों में 50 से 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
बकाया राशि भी बहुत जल्दी बढ़ी—
दिसंबर 2023 में 2.53 लाख करोड़ रुपये, दिसंबर 2024 में 2.92 लाख करोड़ रुपये और दिसंबर 2025 में 3 लाख करोड़ रुपये पार करने की उम्मीद है।
यह दिखाता है कि लोग कार्ड से अधिक खर्च कर रहे हैं, लेकिन लौटाने की क्षमता उतनी जल्दी नहीं बढ़ी।
डिफॉल्ट की वृद्धि का क्या कारण है?
- आरबीआई ने इसके कई कारणों का उल्लेख किया है:
- नौकरी खोना या आय कम होना
- गिग कामगारों और फ्रीलांसरों की अनियमित आय
- बहुत से लोन लेना
- 42 से 46 प्रतिशत की ब्याज दर बढ़ी
- अधिक खर्च करने की आदत
इन सब कारणों से लोग कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं और “डिफॉल्टर” बन जाते हैं।
आसान लोन के जाल में जोखिम बढ़ा
बैंक से लोन लेने में पहले लोग हिचकिचाते थे क्योंकि बहुत सारे दस्तावेजों की आवश्यकता होती थी।
मोबाइल ऐप, OTP और KYC से अब पैसा कुछ मिनटों में मिलता है।
इसके बावजूद, आज यही सुविधा भारी पड़ रही है।
ग्राहक अक्सर सोचते हैं: “थोड़ा सा लोन लेते हैं, बाद में चुका देंगे।”लेकिन डिफॉल्ट होने के बाद नया लोन पाना मुश्किल हो जाता है।
बैंकों पर भरोसा खो जाता है जब क्रेडिट स्कोर गिर जाता है।
संतुलन आवश्यक: RBI और बैंक सतर्क हैं
आरबीआई ने बैंकों और NBFCs को ऐसे लोन देने में सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।
इसके लिए, रिजर्व बैंक ने रिस्क वेट (Risk Weight) बढ़ाने जैसे उपायों को अपनाया है ताकि बैंकों को लोन देने से पहले बहुत सोच-समझकर विचार करना चाहिए।
ग्राहकों को भी खर्चों को नियंत्रित करना चाहिए।
अगली बार छोटा लोन भी मुश्किल से मिलेगा अगर बिल समय पर नहीं चुकाएंगे।
युवाओं को ज्ञान की आवश्यकता
आज युवा लोग एक ऑनलाइन दुनिया में जी रहे हैं— सब कुछ डिजिटल है, खासकर खरीदारी और पेमेंट।
लेकिन फाइनेंस को समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
सावधानीपूर्वक हर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना चाहिए।
जब आवश्यकता हो तो ही लोन लें और समय पर भुगतान करें।
ऋण सपनों को पूरा कर सकता है, लेकिन बेपरवाही इसे बोझ बना देती है।
उत्कर्ष
आरबीआई की रिपोर्ट साफ करती है कि अनसिक्योर्ड लोन का बढ़ता चलन आम लोगों और बैंकिंग सिस्टम दोनों को चिंतित करता है।
लोगों को फिनटेक कंपनियों से आसान लोन मिलता है, लेकिन इसके साथ बड़े जोखिम भी जुड़े हैं।
लोन लेना बुरा नहीं है, लेकिन समय पर और सोच-समझकर चुकाना सबसे महत्वपूर्ण है।
याद रहे— पैसा उधार लेना आसान है, लेकिन आपकी असली जिम्मेदारी उसे वापस देना है।