ईरान में आग बबूला गुस्सा: ‘दो रात और सड़कों पर उतरो, शहर कब्जा कर लो!’

ईरान में बड़ा हंगामा मचा है। लोग सड़कों पर उतर आए हैं। वे चिल्ला रहे हैं। सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। यह 2022 के बाद सबसे बड़ा विरोध है। महंगाई ने सबको तंग कर दिया। डॉलर के आगे ईरानी पैसा गिर गया। रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। लोग भूखे हैं। नौकरी नहीं मिल रही। अब वे सत्ता बदलने की माँग कर रहे हैं।

रजा पहलवी ने बुलावा दिया। वे कहते हैं, “दो और रातों तक प्रदर्शन करो। शहरों पर कब्जा कर लो।” रजा पहलवी कौन हैं? वे ईरान के पुराने राजा के बेटे हैं। बाहर रहते हैं। लोगों को हौसला दे रहे हैं। ईरान के 31 प्रांतों में आग लग गई। हर जगह लोग सड़क पर हैं। बड़े शहरों से लेकर छोटे गाँव तक।

सरकार डर गई। इंटरनेट बंद कर दिया। फोन काम नहीं कर रहे। लेकिन लोग रुकने वाले नहीं। वे एक-दूसरे से मिलते हैं। नारे लगाते हैं। पुलिस आती है। लाठियाँ चलाती है। फिर भी भीड़ बढ़ती जाती है। मानवाधिकार वाले कहते हैं। 62 लोग मारे गए। शायद और भी ज्यादा।

आर्थिक संकट: जेब खाली, पेट भरा नहीं

ईरान की अर्थव्यवस्था डगमगा रही। महंगाई आसमान छू रही। रोटी महँगी हो गई। दूध, तेल सब महँगा। डॉलर के मुकाबले रियाल टूट गया। एक डॉलर के लिए हजारों रियाल चाहिए। लोग परेशान। दुकानें खाली। नौकरियाँ गायब। युवा बेरोजगार घूम रहे।

सरकार सोच रही। पैसे कहाँ से लाएँ? तेल बिकता है। लेकिन अमेरिका दबाव डालता। प्रतिबंध लगाए। ईरान अलग-थलग। व्यापार रुक गया। लोग चिल्लाते हैं। “हमें रोटी दो!” प्रदर्शन छोटे थे। अब बड़े हो गए। सत्ता के खिलाफ। इस्लामी शासन से तंग।

एक आदमी कहता। “मेरा बेटा भूखा सोया। कल फिर भूखा सोएगा।” महिलाएँ सड़क पर। बच्चे साथ। सब गुस्से में। अर्थव्यवस्था ने आग लगाई। अब सियासत जल रही।

प्रदर्शनों की कहानी: कैसे शुरू हुआ धुआँधार हल्ला

सब कुछ महंगाई से शुरू। लोग दुकानों पर गए। सामान महँगा देखा। गुस्सा फूटा। सड़कें जाम। ट्रक रोके। पुलिस आई। बात बिगड़ी। फिर आग लग गई। 2022 में भी ऐसा हुआ था। तब एक लड़की की मौत पर हंगामा। अब आर्थिक दर्द।

31 प्रांत। हर जगह। तेहरान में लाखों। छोटे शहरों में हजार। लोग मास्क लगाते। नारे लगाते। “आजादी!” “शासन हटाओ!” रजा पहलवी का वीडियो वायरल। सोशल मीडिया पर। VPN से देखते। सरकार ब्लॉक करती। लोग चालाक।

सुरक्षा बल आते। गोलियाँ चलाते। गैस छोड़ते। लोग भागते नहीं। खड़े रहते। रातें जागते। सुबह फिर। हफ्तों से चल रहा। थमने का नाम नहीं। दुनिया देख रही।

सरकार का जवाब: इंटरनेट बंद, लाठियाँ चलाइं

सरकार डर गई। इंटरनेट काट दिया। फोन साइलेंट। लोग अंधेरे में। समन्वय रुके। लेकिन नहीं रुका। लोग मिलते। चिल्लाते। सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई गुस्से में। बोले, “उनकी जगह बता देंगे।” मतलब कुचल देंगे।

सुरक्षा बल तेज। रातों में छापे। गिरफ्तारियाँ। कोड़े मारते। जेल भर गए। मानवाधिकार संगठन चीखे। 62 मौतें। शायद 200। बच्चे भी मरे। महिलाएँ घायल। दुनिया में खबर। संयुक्त राष्ट्र देखे।

सरकार कहती। “विदेशी साजिश।” अमेरिका, इस्राइल का हाथ। लेकिन लोग कहते। “हमारा दर्द असली।” इंटरनेट बंद से गुस्सा और भड़का। लोग सड़क पर ज्यादा।

रजा पहलवी का बुलावा: शहर कब्जा लो!

रजा पहलवी बाहर से बोलते। “दो रात और। प्रदर्शन जारी रखो। शहरों पर कब्जा।” वे शाही परिवार से। पिता शाह थे। 1979 में सत्ता गई। अब वापसी की बात। लाखों समर्थक। सोशल मीडिया पर वीडियो। “हम साथ हैं। डरो मत।”

लोग सुनते। जोश आता। तेहरान में नारे। “रजा आओ!” पुलिस रोकती। लेकिन भीड़ बड़ी। रजा कहते। “लोग जीतेंगे। नया ईरान बनेगा।” यह बुलावा आग में तेल। प्रदर्शन तेज।

दुनिया की नजर: क्या होगा आगे?

दुनिया चुप नहीं। अमेरिका बोला। “लोगों का साथ।” यूरोप चिंता। संयुक्त राष्ट्र बोला। “हिंसा बंद करो।” ईरान अकेला। पड़ोसी देखते। सऊदी, तुर्की। क्या बदलेगी सत्ता? मुश्किल। लेकिन लोग हार मानें नहीं।

आगे क्या? प्रदर्शन बढ़ें। सरकार दबाए। या बातचीत? इतिहास कहता। बड़े बदलाव आते। 1979 क्रांति याद। अब उलटी? देखते हैं।

निष्कर्ष: उम्मीद की किरण

ईरान जल रहा। लोग लड़े रहे। महंगाई से शुरू। सत्ता तक पहुँचा। रजा पहलवी हौसला दे। सरकार दबा रही। लेकिन आग बुझेगी नहीं। दुनिया देखे। शायद नया दौर आए। लोग चाहते आजादी। रोटी। नौकरी। भविष्य।