राजनीति, समाज और सत्ता पर खुलकर बोलने वाले धार्मिक लोगों पर बहस होनी चाहिए। उत्तराखंड के जोशीमठ के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी ऐसे ही संत हैं, जो अपने स्पष्ट और कठोर बयानों के लिए जाना जाता है। उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं, चाहे वे सरकारी नीतियों पर सवाल उठाएं, दूसरे संतों पर कटु हमले करें या बड़े नेताओं पर टिप्पणी करें।
हाल के महीनों में दिल्ली से प्रयागराज तक उनके नाम की गूंज सुनाई दी। उन्होंने हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय दी, चाहे वह मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर मेला प्रशासन से टकराव हो या सिंधु जल समझौते पर सरकार को घेरना हो। हम इस रिपोर्ट में उनके महत्वपूर्ण बयानों और बहसों को सरल भाषा में समझेंगे, जिन पर देश भर में बहस हुई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कौन हैं?
श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जन्म 5 अगस्त 1969 को ब्राह्मणपुर, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। उमाशंकर उपाध्याय उनका मूल नाम था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ली। बाद में वे वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शिक्षण प्राप्त किया। 1994 में, वे पढ़ाई करते हुए छात्रसंघ का चुनाव जीता और छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे।
धार्मिक जीवन की ओर उनका रुझान बहुत जल्दी हुआ। वे स्वामी करपात्री जी महाराज से संस्कृत और शास्त्रीय ज्ञान प्राप्त करने लगे। 15 अप्रैल 2003 को उन्हें दंड संन्यास की दीक्षा दी गई, जिसके बाद उन्हें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम दिया गया। सितंबर 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्हें ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य नियुक्त किया गया, हालांकि आज भी सुप्रीम कोर्ट में इस पद पर विवाद चल रहा है।
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के बारे में बहस
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर शंकराचार्य और मेला प्रशासन के बीच हाल ही में एक विवाद हुआ। प्रशासन ने उन्हें स्नान के लिए पालकी पर जाने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस और समर्थकों के बीच झगड़ा हुआ। इससे गुस्से में शंकराचार्य ने धरना लगाया। उनका कहना था कि संतों का सम्मान नष्ट हो जाएगा। कुछ ही घंटों में यह मामला एक बड़ा मुद्दा बन गया।
राहुल गांधी की मंदिर प्रवेश पर प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उनका कहना था कि राहुल गांधी हिंदू नहीं हैं और उनका राम मंदिर में प्रवेश वर्जित है। उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील की कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदुओं को बदनाम करता है, मंदिर में नहीं आने दिया जाए। राजनीतिक क्षेत्रों में इस बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई।
सिंधु जल समझौते पर सरकार का विरोध
उन्होंने सिंधु जल समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि सरकार कहती है कि पाकिस्तान को पानी नहीं मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। उनका कहना था कि पानी को रोकने के लिए कम से कम दो दशक लगेंगे। जनता को संधि खत्म करने की बात कहकर धोखा नहीं खाना चाहिए। उन्हें यह भी कहा कि पहले आतंकी हमलों में शामिल लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
वक्फ संशोधन बिल
वक्फ संशोधन बिल को अप्रैल 2025 में उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना था कि यह बिल मुसलमानों के लिए “सौगात-ए-मोदी” की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन इससे कोई लाभ नहीं हुआ। उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान है, जिसका कोई वास्तविक प्रभाव नहीं है।
प्रधानमंत्री का जन्मदिन
19 सितंबर 2024 को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिए गए बयान ने भी बहस पैदा की। Shivacharya ने कहा कि अंग्रेजी तारीख से जन्मदिन मनाने वाले हिंदू नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा में देवी-देवताओं की तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर से नहीं जुड़ी होतीं। यह बयान सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों का कारण बना।
गौ हत्या का मुद्दा
उन्होंने गौ हत्या के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से सीधा सवाल भी पूछा। उनका कहना था कि गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए अगर प्रधानमंत्री खुद को हिंदू बताते हैं। उन्हें लगता था कि यह दबाव था और सच्चाई सामने लाने या दिखावे की राजनीति को समाप्त करने की जरूरत है।
सोना केदारनाथ मंदिर से गायब होने के आरोप
15 जुलाई 2024 को, उन्होंने कहा कि केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब हो गया था। ICC अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने इस पर सबूत मांगे। उनका कहना था कि ऐसे आरोप सिर्फ चर्चा में बने रहने के लिए लगाए जाते हैं, बिना किसी प्रमाण के। यह भी बहुत समय तक चर्चा में रहा।
काशी कॉरिडोर के खिलाफ विरोध
उन्होंने काशी कॉरिडोर को लेकर कहा कि मंदिर बनाने के नाम पर सैकड़ों साल पुरानी मूर्तियों को तोड़ा गया था। उनका कहना है कि एक मंदिर को सुंदर बनाने के लिए बहुत सी प्राचीन मूर्तियों को नष्ट करना गलत है। उनका कहना था कि उन्होंने खुद मलबे में पड़ी मूर्तियां देखी हैं और जीवन भर इसका विरोध करेंगे।
उद्धव ठाकरे का महाकुंभ संबंधी बयान
जुलाई 2024 में उन्होंने उद्धव ठाकरे को विश्वासघात की बात बताई और कहा कि वे दुखी रहेंगे जब तक वे फिर से मुख्यमंत्री नहीं बनते। साथ ही, प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया कि उन्हें मौत का पता नहीं था। उन्हें लगता था कि संत समाज को धोखा मिल गया है।
रामभद्राचार्य के खिलाफ संघर्ष
रामभद्राचार्य पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शास्त्रों के खिलाफ जाकर संन्यास लेने का आरोप लगाया। यद्यपि विकलांग व्यक्तियों को संन्यास का अधिकार नहीं है, उन्होंने दावा किया कि वे दंडित होकर घूम रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने उन पर राजनीति करने और खुद को प्रोत्साहित करने का भी आरोप लगाया।
शंकराचार्य पद पर बहस
सितंबर 2022 से ही उनके शंकराचार्य बने रहने पर प्रश्न उठते रहे हैं। नियमों के खिलाफ कुछ अखाड़ों ने उनकी नियुक्ति को बताया। सुप्रीम कोर्ट में मामला है। उनके पट्टाभिषेक पर भी अक्टूबर 2022 में कोर्ट ने रोक लगा दी थी। उनके वकील का कहना है कि उनकी स्थिति कोर्ट के आदेशों से मजबूत हुई है क्योंकि उन्हें शंकराचार्य कहा गया है।
उत्कर्ष
आज के संतों में से एक हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। वे हर बात पर खुलकर अपनी राय देते हैं। यही कारण है कि वे अक्सर बहस में आते हैं। उन्हें उनके समर्थकों ने निडर संत बताया है, जबकि आलोचक कहते हैं कि उनकी बातें समाज को परेशान करती हैं। सच जो भी हो, देश उनकी हर बात सुनता है।