सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों की ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मांग लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों को ऐसी कहानियां पसंद आती हैं जो आखिर तक बांधे रहती हैं और अंत में जोर का झटका देती हैं। फिल्में कभी-कभी चुपचाप आती हैं, लेकिन एक बार देखने पर दिल और दिमाग दोनों पर गहरी छाप छोड़ती हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही फिल्म के बारे में बता रहे हैं, जो लगभग तीन साल पहले रिलीज हुई थी और आज OTT पर चर्चा का विषय बन चुकी है। इस फिल्म का नाम चिथा है।
सस्पेंस थ्रिलर का बढ़ता क्रेज OTT पर
आज लोग थिएटर में नहीं जाते, बल्कि मोबाइल फोन और टीवी पर फिल्में देखते हैं। नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे प्लेटफॉर्म पर सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों का सर्वाधिक सर्च होता है। कारण स्पष्ट है। ऐसी फिल्में हमें विचलित करती हैं। कहानी सीधी नहीं है। हर सीन में एक नया प्रश्न उठाया जाता है। ‘दृश्यम’ जैसी फिल्मों ने इस क्षेत्र को और भी लोकप्रिय बनाया है।
इस कड़ी में अब शब्द “चिट्ठा” भी जुड़ गया है। फिल्म देखने के बाद लोगों का कहना है कि इसका क्लाइमेक्स हृदय को हिला देता है।
क्या है फिल्म का कुल आकार और लंबाई?
इस फिल्म का समय २ घंटे १८ मिनट है। शुरू में, यह फिल्म थोड़ी सामान्य लग सकती है। रिश्तों की कहानी, गांव का वातावरण और आम जीवन दिखाई देते हैं। लेकिन आप स्क्रीन से नहीं हटा सकते जैसे-जैसे कहानी चलती है। हर सीन आपको अगले चरण के लिए तैयार करता है।
कहानी का प्रारंभ
यह फिल्म एक चाचा और उसकी प्यारी भतीजी पर आधारित है। दोनों में एक मजबूत संबंध दिखाई देता है। रोजाना बच्ची को स्कूल छोड़ने के लिए चाचा जाता है। दोनों एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते हैं, हंसते हैं और बातें करते हैं। शुरू में सब कुछ सामान्य और शांत लगता है।
लेकिन इसी शांतता में कहानी अंधेरे की ओर बढ़ने लगती है।
बच्चों की रहस्यमय गायबता
गांव में कुछ छोटे बच्चे अचानक गायब होने लगते हैं। गांववासी न तो अधिक सवाल पूछते हैं और न पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेती है। यही कहानी को और भी भयानक बनाता है।
सड़क पर एक आदमी बच्चियों को बहलाता है। वह उन्हें विश्वास दिलाता है, फिर अचानक चला जाता है। शुरू में कोई शक नहीं करता, लेकिन बाद में सच सामने आने लगता है।
दिल को दहला देने वाली सच्चाई
फिल्म में दिखाया गया अपराध अत्यंत भयानक है। वह आदमी बच्चियों को न केवल अगवा करता है, बल्कि उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करता है। खेतों में उन्हें जिंदा जला देता है। यह सीन देखना मुश्किल है। यहां फिल्म कुछ भी नहीं करती। दिल भारी हो जाता है जब सच्चाई सीधे दिखाई देती है।
चाचा पर फर्जी आरोप
कहानी में बड़ा मोड़ आता है जब चाचा को अपने दोस्त की बेटी के साथ गलत काम करने का झूठा आरोप लगाया जाता है। उसकी जिंदगी इस आरोप से प्रभावित होती है। डर से उसकी भाभी अपनी बेटी को दूर रखने लगती है।
अब वही चाचा, जो भतीजी को हर दिन स्कूल छोड़ता था, उसे छोड़ दिया जाता है। भरोसा समाप्त हो जाता है। रिश्तों को तोड़ दिया जाता है।
भतीजी की अचानक खोज
चाचा भतीजी को एक दिन स्कूल नहीं छोड़ता। बच्ची उसी दिन अचानक गायब हो जाती है। फिल्म का असली संघर्ष यहीं से शुरू होता है। यह प्रश्न उठता है कि बच्ची कहां गई? क्या वही व्यक्ति इसके पीछे है? या फिर कहानी बिल्कुल अलग है।
अब चाचा अपनी भतीजी को खोजने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। पुलिस से संघर्ष करता है। लोगों से प्रश्न पूछता है। हर गली खंगालता है।
कहानी दर्शकों को कैसे बांधे रखती है
आप गलत हैं अगर आपको लगता है कि कहानी बहुत सीधी है। फिल्म आपको बार-बार झूठ बोलती है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि अपराधी दूसरा है। कभी-कभी किसी और पर शक जाता है।
पूरी फिल्म में कई किरदार संदेहपूर्ण हैं। लेकिन वास्तविक सच अंत तक रहता है। इसलिए दर्शक अंतिम सीन तक स्क्रीन पर रहते हैं।
क्लाइमेक्स जो उत्तेजित करता है
फिल्म का अंत शानदार नहीं है। यहाँ कोई सरल उत्तर नहीं है। क्लाइमेक्स में हुआ खुलासा दिल और दिमाग को हिला देता है। यही कारण है कि फिल्म खत्म होने के बाद भी लोग इसका विचार करते रहते हैं।
दर्शकों का कहना है कि इस क्लाइमेक्स ने उन्हें “दृश्यम” की याद दिला दी, लेकिन दृश्य पूरी तरह से अलग है।
कलाकारों का उत्कृष्ट प्रदर्शन
Siddharth ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है। उनका चाचा का किरदार बहुत सच्चाई से निभाया गया है। उनकी आंखें दर्द से भर गई हैं।
Nimisha Sajayan उनके साथ दिखती है। उनका मजबूत किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है।
चाइल्ड एक्टर सहर्षा श्री को सबसे अधिक प्रशंसा मिली है। इतनी कम उम्र में उन्होंने दिल को छूने वाला अभिनय किया है।
क्यों आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?
यह फिल्म सिर्फ कहानी नहीं है। यह समाज के मुद्दे भी उठाता है। फिल्म में बच्चियों की सुरक्षा, पुलिस की लापरवाही और आम लोगों की चुप्पी जैसे मुद्दे स्पष्ट हैं।
यह फिल्म आपको भयभीत करती है, आपको विचार करने पर मजबूर करती है और अंत में आपके मन को हिला देती है।
OTT पर देखने के लिए स्थान
“चिट्ठा” OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और धीरे-धीरे दर्शकों में अपना स्थान बना रहा है। यदि आप थ्रिलर और सस्पेंस फिल्मों का शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में होनी चाहिए।
अंतिम शब्द
फिल्में कभी-कभी कम शोर करती हैं, लेकिन उनका असर बहुत गहरा होता है। ऐसी ही एक फिल्म है “चिट्ठा”। इसका अभिनय, क्लाइमेक्स और कहानी लोगों को लंबे समय तक याद रहता है।
यह फिल्म आपकी सोच बदल सकती है अगर आपने अब तक हर बड़ा सस्पेंस देखा है।