राजकोट में एकता की जीत: जब हिंदू और मुसलमान साथ आए और कानूनी लड़ाई जीती

राजकोट से एक भावुक खबर आई है। यह कहानी डर से शुरू हुई, लेकिन उम्मीद और प्रसन्नता से समाप्त हुई। कुछ दिन पहले सैकड़ों परिवारों के सिर पर छत गिरने का खतरा था। लोग भयभीत थे। महिलाएं, बच्चे और बुढ़े सभी परेशान थे। लेकिन इस कठिन समय में हिंदू और मुसलमान एकजुट हुए। उन्होंने आपस में हाथ मिलाया और कानून का पालन करने का निर्णय लिया। आखिरकार, गुजरात हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया। यह एक कानूनी जीत नहीं थी; यह इंसानियत और एकता की जीत भी थी।

पूरी बात क्या थी?

गुजरात सरकार ने कुछ दिन पहले राजकोट के जंगलेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक नोटिस भेजा था। इन नोटिसों में बताया गया था कि सरकारी जमीन पर 1358 घर बने हैं। प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोग अतिक्रमण कर रहे हैं और जमीन सरकारी है। उन्हें घरों को सात दिनों के अंदर खाली करने का आदेश दिया गया था।

पूरे इलाके में भय फैल गया। सात दिनों में घर खाली करना मुश्किल काम है। इन घरों में लगभग 7000 लोग रहते हैं। इनमें छोटे बच्चे, स्कूल जाने वाले विद्यार्थी, कर्मचारी और बुजुर्ग शामिल हैं। अब हम कहां जाएंगे, यह सभी के मन में था।

जंगलेश्वर और आसपास

जंगलेश्वर क्षेत्र आजी और खोखरदडी नदियों के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यहाँ वर्षों से लोग रह रहे हैं। जंगलेश्वर के अलावा इस क्षेत्र में बुद्ध नगर, राधाकृष्ण नगर, नालोदा नगर और सिद्धार्थ नगर भी हैं। इस पूरे क्षेत्र को लोग जंगलेश्वर कहते हैं।

यह स्थान भी खास है क्योंकि यहाँ बहुत सारे लोग रहते हैं। जंगलेश्वर में अधिकांश मुस्लिम परिवार हैं। वहीं हिंदू परिवारों की संख्या अधिक है। लोगों ने वर्षों से एक साथ रहते आया है। उनका पड़ोस मजबूत है।

भय और चिंता का वातावरण

लोगों की नींद उड़ गई जब नोटिस आया। बहुत से परिवारों ने अपने घर बनाने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी थी। किसी ने ऋण लिया, तो किसी ने गहने बेचे। सभी अचानक घर छोड़ने का आदेश सुनकर घबरा गए।

कुछ व्यक्ति रोने लगे। कुछ लोगों ने अपने बच्चों की ओर देखा और उनके भविष्य का विचार किया। लोग एक दूसरे से बात करने लगे। सभी ने समझा कि अकेले लड़ना कठिन है। तभी एकता का विचार आया।

हिंदू-मुस्लिम एकता परिषद की स्थापना

इलाके में हिंदू और मुसलमान एक बार फिर एकजुट हो गए। उनका संगठन हिंदू-मुस्लिम एकता मंच था। इस मंच का उद्देश्य एक था। हर व्यक्ति का घर बचाना और न्याय की लड़ाई लड़ना

मंच ने फैसला किया कि वे शांत रहेंगे। वे कानून को मानेंगे। वे कोई संघर्ष नहीं करेंगे। वे न्यायालय जाएंगे और सच को सामने रखेंगे। सभी को इस निर्णय से शक्ति मिली।

कानूनी संघर्ष की शुरुआत

हिंदू-मुस्लिम एकता मंच ने अधिवक्ताओं से बातचीत की। वे पूरी बात जानते थे। उनके पास कागज था। वे सालों से यहाँ रह रहे लोगों को दिखाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि सही जांच के बिना नोटिस दिए गए हैं।

कोर्ट में यह मुकदमा सरल नहीं था। कई बार तारीखें दी गईं। हर दिन लोग दुआ करते थे। हिंदू धर्म के मंदिरों में प्रार्थना करते थे। Muslims मस्जिदों में दुआ मांगते थे। लेकिन उनके एक-दूसरे के साथ होना सबसे महत्वपूर्ण था।

एकता का उदाहरण

इस दौरान लोगों ने एकता की मिसाल दी। Muslims अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ मंदिर गए। वहां वे एक साथ प्रार्थना की। हिंदू भी हसनशाह पीर के मकबरे पर अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ गए। वहां उन्होंने अपने सिर झुकाकर शांति की प्रार्थना की।

यह दृश्य बिल्कुल अलग था। लोगों का कहना था कि दुःख में एक दूसरे के साथ रहना ही असली धर्म है। बच्चे भी देख रहे थे। उन्हें पता चला कि सबसे महत्वपूर्ण बात इंसानियत है।

हाई कोर्ट का निर्णय

सोमवार का दिन इलाके में बहुत विशिष्ट था। गुजरात हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया। गुजरात लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 202 के तहत जारी नोटिस को न्यायालय ने रद्द कर दिया। स्थानीय मामलतदार ने यह सूचना दी थी।

कोर्ट के फैसले से पूरा इलाका खुश हो गया। लोग सड़कों पर चले गए। किसी की आंखें खुशी से भर गईं। एक व्यक्ति ने मिठाई बाँटी। बच्चे प्रसन्न होकर नाचने लगे। यह उनके लिए एक नई जिंदगी की शुरुआत थी।

लोगों की खुशी और सुविधा

स्थानीय लोगों ने कहा कि यह निर्णय उनके लिए बहुत राहत देता था। अब उनका घर छिनने का डर नहीं था। उन्हें लगता था कि उनका प्रयास सफल हुआ। उनका कहना था कि एकजुट होने से जीत असंभव होगी।

यह भी कहा गया कि लड़ाई ने उन्हें और करीब लाया। अब वे सिर्फ हिंदू या मुसलमान नहीं, बल्कि दोस्त और पड़ोसी हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया

शहर के सामाजिक कार्यकर्ता पुरुषोत्तम पिपरिया ने इस एकता की प्रशंसा की। उनका कहना था कि जंगलेश्वर के लोगों की आपदा के समय एकजुटता अद्भुत है। उन्हें लगता था कि यह “विशाल खारे समुद्र में मीठे पानी की बूंदें” थीं।

उनका कहना था कि आज ऐसी खबरें कम होती हैं। पूरा समाज इस घटना से एक अच्छा संदेश लेता है। यह प्रदर्शित करता है कि एक साथ रहने से हर चुनौती आसानी से पार हो सकती है।

बच्चों को सीखना

बच्चों को भी इस कहानी से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वे समझते हैं कि विवाद कुछ नहीं लाता। साथ रहना शक्ति देता है। वे यह भी जानते हैं कि धर्म अलग-अलग हो सकता है, लेकिन दुःख और खुशी एक हैं।

जंगलेश्वर के बच्चों ने अपने माता-पिता को एक दूसरे से लड़ते देखा। उन्होंने देखा कि समझदारी और बातचीत ने एक बड़ी समस्या को हल किया।

भविष्य की आशा

अब इलाके की जनता भविष्य को देखकर उत्साहित है। वे सरकार से बातचीत करना चाहते हैं। वे स्थायी समाधान चाहते हैं। साथ ही वे चाहते हैं कि उनकी एकता बरकरार रहे।

लोगों का कहना है कि यह जीत केवल उनके घर की नहीं है। भरोसा जीता है। यह साबित करता है कि एक-दूसरे पर भरोसा करने वाले लोगों को सबसे बड़े भय भी हरा जाता है।

उत्कर्ष

राजकोट का जंगलेश्वर इलाका आज एक उदाहरण है। यहां के लोगों ने इंसानियत को धर्म से ऊपर रखा। डर से वे झुक नहीं पाए। उनका कानून पर भरोसा था। एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण था।

यह कहानी हमें बताती है कि एकता सच्ची शक्ति है। हिंदू और मुसलमान एक साथ काम करते हैं, तो कोई मुश्किल से उन्हें तोड़ नहीं सकता। राजकोट की जीत सदियों तक स्मरणीय रहेगी।