भारत में खेती करने के लिए करोड़ों किसान कर्ज पर निर्भर हैं। मजदूरी, खाद, दवा और बीज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में KCC, या किसान क्रेडिट कार्ड, बहुत मदद करता है। अब इस योजना में महत्वपूर्ण बदलाव होने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक नए नियमों को लागू करने की योजना बना रहा है। इन नियमों से कृषि कर्ज की प्रकृति बदल सकती है। सवाल यह है कि क्या किसानों को अधिक लाभ मिलेगा या क्या नई आवश्यकताएं पैदा होंगी? आइए, आसान शब्दों में पूरी खबर समझते हैं।
RBI ने KCC के नियमों को क्यों बदल दिया?
विकास और रेगुलेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि KCC के लिए नए दिशानिर्देश बनाए जा रहे हैं। बैंक ने कहा कि अभी विभिन्न नियम अलग-अलग स्थानों पर हैं। कभी-कभी यह परेशान करता है। अब सभी नियम एकत्रित किए जाएंगे। आसान बनाया जाएगा। नई आवश्यकताओं को भी शामिल किया जाएगा।
6 मार्च 2026 तक आरबीआई इन मसौदा नियमों पर सुझाव चाहता है। यानी ये नियम अभी अंतिम नहीं हैं। बैंक, किसान संगठन और आम लोग अपनी राय दे सकते हैं। इसके बाद अंतिम निर्णय होगा।
KCC क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है?
किसान बैंक से आसानी से कर्ज ले सकते हैं किसान क्रेडिट कार्ड से। हर बार उन्हें लंबी प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती। वे जरूरत के हिसाब से धन निकाल सकते हैं। फसल बेचने के बाद धन वापस कर सकते हैं।
यह योजना बड़े और छोटे किसानों के लिए फायदेमंद है। खासकर छोटे किसानों के लिए समय पर पैसा मिलने पर खेती होती है। यही कारण है कि KCC का नाम किसानों की जीवनरेखा है।
पहला महत्वपूर्ण बदलाव: फसल का समय निर्धारित करें
अब रिजर्व बैंक ने फसल सीजन को महीनों के आधार पर निर्धारित करने का निर्णय लिया है। गणना पहले अलग-अलग स्थानों पर की जाती थी। अब दो प्रकार की खेती मानी जाएगी।
१२ महीने की फसल छोटी अवधि की होगी। लंबी अवधि की फसल 18 महीने की होगी। इससे लोन मंजूरी और भुगतान की शर्तें स्पष्ट हो जाएंगी। किसानों और बैंकों को सब कुछ पता होगा।
इस परिवर्तन से भ्रम कम होगा। किसान को पता रहेगा कि उसे कितना समय मिलेगा और किस श्रेणी की फसल उगाई जाएगी।
दूसरा सुधार: KCC का कुल समय अब छह साल है
किसानों को यह बदलाव राहत देगा। KCC की कुल अवधि अब छह वर्ष हो गई है। पहले लंबी फसलों के लिए लोन की समय सीमा नहीं थी। किसानों पर कई बार दबाव डाला गया था।
अब लोन की अवधि और फसल की अवधि बेहतर ढंग से मिल जाएगी। किसानों को लंबी अवधि की फसल उगाने के लिए अधिक समय मिलेगा। इससे उसे पैसा वापस नहीं मिलेगा।
यह कदम खासतौर पर ऐसी फसलों (जैसे बागवानी) के लिए लाभदायक होगा जिनमें अधिक समय लगता है।
तीसरा परिवर्तन: असली लागत से कर्ज
अब तक, कर्ज की सीमा अक्सर पूर्वानुमान पर निर्धारित हुई है। लेकिन कृषि लागत हर साल बदलती रहती है। डीजल बहुत महंगा है। बीज और खाद की लागत बढ़ती है। मजदूरी भी अधिक होती है।
नए नियम के अनुसार, ड्रॉइंग लिमिट हर फसल सीजन की लागत पर निर्भर करेगी। खेती की असली लागत के हिसाब से यानी किसान को कर्ज मिलेगा। यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।
लागत बढ़ने से कर्ज सीमा भी बढ़ेगी। इससे बीच में पैसा नहीं खो जाएगा। किसान को साहूकार की जरूरत कम होगी।
चौथा सुधार: तकनीक और आधुनिक खेती का प्रोत्साहन
अब KCC से बीज और खाद के अलावा नई तकनीक के लिए भी धन मिल सकेगा। कृषक मिट्टी की जांच कर सकेंगे। वास्तविक समय में मौसम की जानकारी प्राप्त करने में खर्च कर सकेंगे। ऑर्गेनिक या बेहतर खेती पद्धतियों के प्रमाणीकरण पर भी धन खर्च कर सकते हैं।
इन खर्चों को कृषि संपत्ति की मरम्मत और रखरखाव के लिए मिलने वाले अतिरिक्त २० प्रतिशत में जोड़ा गया है। आधुनिक खेती को यानी किसान अपना सकते हैं।
भविष्य में खेती इस बदलाव से मजबूत हो सकती है। यदि किसान खेती करते समय सही जानकारी का उपयोग करते हैं तो उत्पादन भी बढ़ सकता है।
किन बैंकों पर नए नियम लागू होंगे?
व्यापारिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और ग्रामीण सहकारी बैंकों पर ये प्रस्तावित नियम लागू होंगे। यानी KCC प्रदान करने वाले लगभग सभी बैंकों को ये नए नियम लागू होंगे।
इसका अर्थ है कि देश भर के किसान इन बदलावों से प्रभावित होंगे। नियम समान होंगे, चाहे किसान शहर के पास हो या दूर गांव में हो।
RBI को सुझाव भेजने का तरीका
6 मार्च 2026 तक सरकारी संस्थाएं, आम जनता और अन्य हितधारक सुझाव दे सकते हैं, RBI ने कहा है। RBI की वेबसाइट पर स्थित “Connect 2 Regulate” सेक्शन से सलाह प्राप्त की जा सकती है।
ईमेल से भी सलाह दी जा सकती है। ईमेल का सब्जेक्ट ड्राफ्ट संशोधन निर्देशों का पूरा नाम शामिल करना आवश्यक है। यानी किसी को अपनी चिंता या सुधार के लिए सुझाव देने का अधिकार है।
किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा
यदि ये बदलाव लागू होते हैं तो किसानों को पहले से ही कर्ज लेना और चुकाना आसान होगा। नियम स्पष्ट होंगे। समय सीमा दिखाई देगी। लोन की अवधि फसल की अवधि के हिसाब से निर्धारित होगी।
लंबी फसल उगाने वाले किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है। अब उन्हें जल्दी पैसा वापस मिलने का भय नहीं होगा। KCC की कुल अवधि छह वर्ष होने से स्थिरता आएगी।
यह सबसे बड़ा लाभ होगा कि कर्ज की सीमा खेती की असली लागत के अनुसार निर्धारित होगी। इससे किसानों को बीच सीजन में पैसे की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वे बार-बार बैंक नहीं जाएंगे।
अब किसान KCC से पैसा खर्च करके मिट्टी की जांच, मौसम की जानकारी और बेहतर खेती तकनीक खरीद सकेंगे। इससे खेती अधिक बुद्धिमान होगी। उत्पादकता अधिक हो सकती है। कम नुकसान हो सकता है।
क्या नई शर्तें विकसित होंगी?
RBI ने फिलहाल सिर्फ मसौदा जारी किया है। इसमें मुख्य रूप से नियमों को स्पष्ट और आसान बनाने का मुद्दा उठाया गया है। अभी तक कोई संकेत नहीं आया है कि शर्तें बहुत कठोर होंगी।
लेकिन अंतिम नियम लागू होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए बैंकों और किसान संगठनों का विचार महत्वपूर्ण माना जाता है।
भविष्य में क्या होगा?
6 मार्च 2026 तक सुझाव मिलने के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक सभी सुझावों पर विचार करेगा। फिर अंतिम दिशानिर्देशों का प्रसारण होगा। इसके बाद बैंक अपने प्रणाली को बदलेंगे। नए नियम धीरे-धीरे लागू होंगे।
खेती के भविष्य को यह बदलाव प्रभावित कर सकता है। नियम सही तरीके से लागू होने पर किसान को समय पर और सही रकम में कर्ज मिलेगा। इससे खेती को बल मिलेगा।
उत्कर्ष
किसानों को राहत मिल सकती है किसान क्रेडिट कार्ड में प्रस्तावित बदलाव से। तकनीक के लिए धन मिलना, असली लागत के हिसाब से कर्ज मिलना और फसल की अवधि तय होना महत्वपूर्ण कदम हैं।
यह योजना और मजबूत होगी अगर सरकार और आरबीआई किसानों की आवश्यकताओं को समझकर अंतिम नियम बनाएंगे। किसान कम परेशान होगा। खेती सुविधाजनक होगी।
6 मार्च 2026 के बाद आने वाले अंतिम फैसले पर अब सबका ध्यान है। किसानों की आशा है कि यह बदलाव उनके लिए नए अवसर खोलेगा।