कनाडा में बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वालों के लिए अब हालात बदल गए हैं। जो लोग अब तक खुद को सुरक्षित समझ रहे थे, उनकी नींद उड़ चुकी है। भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल ने कनाडा जाकर ऐसा कड़ा संदेश दिया है, जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है। दो दिन की बैठकों ने भारत और कनाडा के रिश्तों को नई दिशा दी है। यह दौरा सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भविष्य की साफ रणनीति तय हुई। अब खालिस्तानी नेटवर्क को न तो छूट मिलेगी और न ही बचने का रास्ता।
कनाडा अब सेफ हेवन नहीं
लंबे समय से कनाडा पर आरोप लगते रहे हैं कि वहां खालिस्तानी चरमपंथियों को खुली छूट मिलती है। भारत बार-बार कहता रहा कि वहां से भारत विरोधी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। अब इस तस्वीर में बड़ा बदलाव दिख रहा है। अजीत डोभाल ने कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ साफ शब्दों में बात रखी। संदेश सीधा था। कनाडा की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। बातचीत में यह तय हुआ कि खालिस्तानी नेटवर्क को अब राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि संगठित अपराध माना जाएगा।
फ्री स्पीच का पर्दा हटा
अब तक कई बार खालिस्तानी गतिविधियों को अभिव्यक्ति की आजादी का नाम दिया जाता था। इसी बहाने उन पर कार्रवाई नहीं होती थी। इस बार ऐसा नहीं हुआ। डोभाल ने ठोस सबूत सामने रखे। उन्होंने दिखाया कि कैसे ये नेटवर्क हिंसा, धमकी और डर का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद कनाडा का रुख पूरी तरह बदल गया। अब यह माना गया कि यह आजादी की बात नहीं है, बल्कि कानून तोड़ने का मामला है। अब इन लोगों पर वही कार्रवाई होगी, जो किसी गैंग या अपराधी समूह पर होती है।
भारत-कनाडा रिश्तों में नया मोड़
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत ने दोनों देशों के रिश्तों को रीसेट कर दिया है। पहले जहां शक और तनाव था, वहां अब भरोसे की बात हो रही है। कनाडा ने साफ कहा कि वह किसी भी हिंसक समूह का समर्थन नहीं करेगा। खास बात यह है कि अब दोनों देश मिलकर काम करेंगे। ड्रग्स, साइबर खतरे और आतंक से जुड़ी जानकारी तुरंत साझा होगी। इसमें खालिस्तानी लिंक वाले समूह खास निशाने पर होंगे।
रियल टाइम जानकारी का फैसला
इस बैठक का सबसे बड़ा नतीजा रियल टाइम जानकारी साझा करने का फैसला है। इसका मतलब साफ है। अगर कनाडा में कहीं भी भारत के खिलाफ साजिश रची जाती है, तो भारत को तुरंत खबर मिलेगी। इसके लिए दोनों देश अपने यहां सुरक्षा और कानून से जुड़े संपर्क अधिकारी तैनात करेंगे। अब एजेंसियां अलग-अलग नहीं, बल्कि एक टीम की तरह काम करेंगी। इससे अपराधियों के लिए बच निकलना मुश्किल हो जाएगा।
ड्रग्स और आतंक का काला सच
अजीत डोभाल ने खालिस्तानी नेटवर्क की कमर तोड़ने वाली बात सामने रखी। उन्होंने बताया कि ये समूह नशीली दवाओं की तस्करी से मोटी कमाई करते हैं। खासकर फेंटानिल जैसे खतरनाक ड्रग्स से पैसा आता है। यही पैसा भारत के खिलाफ नफरत फैलाने में लगाया जाता है। बैठक में यह भी बताया गया कि कैसे ये लोग आम प्रवासी भारतीयों को डराते हैं। उनसे जबरन पैसे वसूले जाते हैं। यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं, बल्कि कनाडा की भी है।
इमिग्रेशन सिस्टम की खामियां
बातचीत में यह मुद्दा भी उठा कि आतंकी इमिग्रेशन नियमों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। वे खुद को शरणार्थी या कार्यकर्ता बताकर देश में घुस जाते हैं। इसके बाद नेटवर्क खड़ा करते हैं। अब इस रास्ते को बंद करने की तैयारी है। दोनों देशों के बीच डेटा साझा होगा। संदिग्ध लोगों की पहचान पहले ही कर ली जाएगी। इससे नए लोगों की एंट्री पर रोक लगेगी।
ऑनलाइन नफरत पर शिकंजा
आज के दौर में इंटरनेट सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। खालिस्तानी समूह सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करते हैं। वे यहीं से लोगों को जोड़ते हैं और फंड जुटाते हैं। इस पर भी कड़ा फैसला हुआ है। अब कनाडा की पुलिस ऐसे अकाउंट्स पर सीधे कार्रवाई करेगी। नफरत फैलाने वाले पोस्ट और वीडियो को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। ऑनलाइन कट्टरता को भी अपराध माना जाएगा।
पब्लिक सेफ्टी का मुद्दा बना खालिस्तान
पहले खालिस्तान का मुद्दा भारत-कनाडा के बीच एक राजनयिक बहस माना जाता था। अब ऐसा नहीं है। कनाडा ने इसे अपनी जनता की सुरक्षा से जोड़ दिया है। अजीत डोभाल ने कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री से मिलकर यह साफ किया। संदेश स्पष्ट था। अगर किसी गतिविधि से आम लोगों की सुरक्षा को खतरा है, तो उस पर सख्त कदम उठेंगे। इसमें भारत विरोधी तत्व भी शामिल हैं।
डर का माहौल खत्म होगा
कनाडा में रहने वाले कई भारतीय लंबे समय से डरे हुए थे। उन्हें धमकियां मिलती थीं। कई बार कार्यक्रमों पर हमला होता था। अब हालात बदलने की उम्मीद है। जब सरकार खुद ऐसे समूहों पर कार्रवाई करेगी, तो आम लोगों का भरोसा बढ़ेगा। इससे शांतिपूर्ण माहौल बनेगा। यह बदलाव सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि कनाडा के लिए भी फायदेमंद है।
मार्च में बड़ी मुलाकात
यह दौरा सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं था। यह आने वाले समय की बड़ी तैयारी भी थी। मार्च के पहले हफ्ते में कनाडा के प्रधानमंत्री भारत आने वाले हैं। इस यात्रा में कई बड़े समझौते होने की उम्मीद है। ऊर्जा, खनिज और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। अरबों डॉलर की डील पर बात हो सकती है। लेकिन संदेश साफ है। व्यापार और आतंक साथ नहीं चल सकते।
साफ और कड़ा संदेश
अजीत डोभाल ने कनाडा को यह बात समझा दी है कि दोस्ती तभी मजबूत होगी, जब जमीन पर कार्रवाई दिखेगी। अगर कनाडा भारत के साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो उसे खालिस्तानी नेटवर्क पर लगाम लगानी होगी। अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि काम देखा जाएगा। यही इस दौरे की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर आने वाले महीनों पर है। क्या सच में खालिस्तानी गतिविधियों पर रोक लगेगी। क्या अपराधियों पर कार्रवाई होगी। अगर तय योजनाएं लागू होती हैं, तो यह एक बड़ा बदलाव होगा। इससे भारत को सुरक्षा मिलेगी और कनाडा को भी राहत। यह कदम दिखाता है कि कूटनीति जब मजबूत होती है, तो असर भी गहरा होता है।
निष्कर्ष
कनाडा अब खालिस्तानियों के लिए सुरक्षित जगह नहीं रहा। अजीत डोभाल की रणनीति ने खेल पलट दिया है। बातचीत ने साफ कर दिया है कि हिंसा और नफरत के लिए अब कोई जगह नहीं है। दोनों देश मिलकर काम करेंगे। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब देखना है कि यह बदलाव जमीन पर कितनी तेजी से नजर आता है।