Supreme Court के पैनल ने काजीरंगा पशु गलियारे के अतिक्रमण पर रिपोर्ट मांगी:

Kanchanpuri कॉरिडोर पर एक रिसॉर्ट में काम शुरू होने के बाद आरटीआई और पर्यावरण कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज की थी.काजीरंगा नेशनल पार्क में एक सींग वाले गैंडों की गिनती से पता चला है कि उनकी संख्या 2,413 हो चुकी है. ये साल 2015 की गिनती से 12 अधिक है.

UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट के अनुसार, असम में पूरी दुनिया के इस तरह के गैंडों की दो-तिहाई आबादी है. ये गिनती हर तीन साल में की जाती है.बीबीसी के साउथ एशिया एडिटर अनबरासन एथिराजन कहते हैं, “ये उनके संरक्षण की एक अविश्वसनीय सफलता की कहानी है.””साल 1970 के दशक में यहां गैंडों की संख्या केवल कुछ सौ में थी.”

हालांकि इनकी सुरक्षी को लेकर कई तरह के विवाद भी हुए हैं.सरकार ने हाल के वर्षों में ही जानवरों की रक्षा के लिए नेशनल पार्क के सुरक्षा कर्मियों (रेंजर्स) को कई तरह की असाधारण शक्तियां दी हैं.

इस तरह के अधिकार भारत में अशांति के वक्त केवल सशस्त्र बलों को ही दिए जाते हैं. साल 2006 से लगभग 150 गैंडों को उनकी सींग के लिए मारा जा चुका है.लेकिन 2015 में पार्क के गार्ड ने उनसे ज्यादा लोगों को मार दिया, जो गैंडों का शिकार करने आते थे.

गिनती के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ ग़ैरसरकारी संगठनों की भी मदद ली गई.इसके लिए 430 वर्ग किलोमीटर के इलाके को 74 भाग में बांटा गया और 300 लोगों की टीम ने इसे अंजाम दिया.हालांकि गैंडों की इस गिनती को फ़िलहाल एक अंदाज़ा बताया जा रहा है.

अधिकारियों का मानना है कि गैंडों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है क्योंकि कुछ जानवर बढ़ती घास और फ़सल के पीछे छिप गए थे.

इन फ़सलों को आमतौर पर जला दिया जाता है ताकि जानवरों की गिनती आसानी से हो सके. लेकिन इस बार बेमौसम की बरसात के कारण ये घास फिर से बढ़ गई थी.इसका मतलब ये हो सकता है कि गैंडों की गिनती अगले साल एक बार फिर से की जाए.

साल 1905 में इसकी शुरुआत के बाद से काजीरंगा नेशनल पार्क को जानवरों का संरक्षण और उनकी जनसंख्या बढ़ाने में काफ़ी सफलता हासिल हुई है.

साथ ही एक सींग वाले गैंडों के लिए ये किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता. भारत सरकार ने इसे टाइगर रिज़र्व के तौर पर भी घोषित कर रखा है.

इसके साथ ही ये हाथी, जंगली भैंस और पक्षियों की कई प्रजातियों का घर भी है. लुप्त होती दक्षिण एशियाई प्रजाति के डॉलफ़िन भी यहां देखे जाते हैं.

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