PSLV-C62 मिशन फेल: अन्वेषा सैटेलाइट अंतरिक्ष में गायब, ISRO को बड़ा झटका!

2026 में आईएसआरओ ने अपना पहला बड़ा मिशन शुरू किया। लेकिन यह मिशन कामयाब नहीं हुआ। SPV-C62 रॉकेट ने आकाश में उड़ान भरी। लेकिन ग्रह सही स्थान पर नहीं पहुँचा। अन्वेषा नामक सैटेलाइट है। श्रीहरिकोटा से यह सूचना मिली है। आइए पूरा मामला जानें। ISRO के वैज्ञानिक हैरान हैं। लेकिन वे विफल नहीं होंगे।

लॉन्च पूरी कहानी?

सुबह श्रीहरिकोटा में धमाल हुआ। सतीश धवन स्पेस सेंटर का पहला लॉन्च पैड पूरी तरह से तैयार था। PRSV-C62 रॉकेट उड़ाने का समय आ गया। रॉकेट ने भयंकर धमाके से उड़ान भरी। हर कोई तालियां बजा रहा था। लॉन्च लगता था सफल था। लेकिन खुशी लंबे समय तक नहीं रही।

रॉकेट आसमान में उड़ान भरता गया। 2026 में पहला ऑर्बिटल मिशन हुआ था। ISRO के कर्मचारी खुश थे। समस्या आई। सैटेलाइट को सही कक्षा में नहीं छोड़ा गया। अनुभूति गायब हो गई। वैज्ञानिक आश्चर्यचकित थे। वे गलतियों की जांच कर रहे हैं।

अन्वेषा सैटेलाइट का क्या अर्थ है?

Невежа कोई साधारण सैटेलाइट नहीं है। यह DRDO ने बनाया था। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) का नाम है। यह सैटेलाइट पृथ्वी को स्पष्ट रूप से देखने के लिए बनाया गया है। हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक से सुसज्जित है। अर्थात यह बहुत छोटी चीजें देख सकता है।

यह सैटेलाइट कृषि में मदद करेगा। जंगल का निरीक्षण करेगा। मौसम की भविष्यवाणी करने में मदद करेगा। DRDO वाले इसे बचाने के लिए उपयोग करना चाहते हैं। लेकिन ऑर्बिट से पहले ही इसे खो दिया गया था। बड़ी क्षति हुई। वैज्ञानिक चिंतित हैं।

यह लॉन्च कहां हुआ?

आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा है। सतीश धवन स्पेस सेंटर वहीं है। ISRO का मुख्यालय यहीं है। पहला लॉन्च पैड लगाया गया था। सुबह रॉकेट उड़ा। आसपास लोग जुटे हुए थे। लाइव प्रसारण चल रहा था। सब लोग इसे देख रहे थे।

रॉकेट ने शानदार शुरूआत की। इंजन चालू हुआ। उसकी ऊंचाई बढ़ी। लेकिन अंतिम चरण में चुनौती सैटेलाइट सही स्थान पर नहीं पहुँचा। ISRO ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। मिशन असफल रहा।

मिशन असफल क्यों हो गया?

कई कारण हो सकते हैं। रॉकेट का कोई हिस्सा काम नहीं कर सका। या सैटेलाइट को अलग नहीं करना पड़ा। वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। डेटा जाँच किया जा रहा है। ISRO जल्द ही सूचना देगा।

यह पहली नहीं है। यह घटना पहले भी हुई है। लेकिन आईएसआरओ सीखता है। अगली बार अच्छा होगा। ISRO देश का गर्व है।

ISRO की यात्रा: सफलताओं का इतिहास

1969 में आईएसआरओ का गठन हुआ था। Mangalyaan और Chandrayaan जैसे सफलताएं PSSV रॉकेट सफल रहे हैं। 50 से अधिक मिशन सफल थे। लेकिन विफलता भी होती है।

2026 में पहला मिशन असफल हो गया। ISRO रुक जाएगा नहीं। Gaganaan के लिए तैयारी चल रही है। भविष्य सुनहरा है। युवा वैज्ञानिकों का उत्साह है।

अनुभूति का महत्व समझें

पृथ्वी की तस्वीर यह सैटेलाइट लेता। रंगीन दिखाता है। किसान अपनी फसल देख सकते हैं। सरकार जंगलों को बचाओ। सैनिक शत्रु को खोजें।

लेकिन अब यह नहीं है। पैसे की बड़ी हानि DRDO-ISRO की संयुक्त कोशिश असफल रही है। नवीनतम प्रयास होगा।

दुनिया क्या करती है?

सोशल मीडिया पर बहस। ISRO को लोगों का समर्थन मिल रहा है। #ISROFail जारी है। कुछ दुखी। कुछ लोग हौसला दे रहे हैं। NASA ने स्पेसएक्स को संदेश भेजा।

भारत में विवाद हुआ। विपक्ष ने प्रश्न उठाया। सरकार ने घोषणा की कि जांच होगी। PM ने ISRO की प्रशंसा की घोषणा की।

क्या अगला कार्यक्रम है?

ISRO एक नया लक्ष्य बनाएगा। SPV-C63 बनाना अनुवेषा की तरह एक और सैटेलाइट बनाएंगे।

वैज्ञानिकों ने 24 घंटे काम किया है। रिपोर्ट तीन दिनों में मिल जाएगी। देश प्रतीक्षा करे।

ISRO की सोशल मीडिया शक्ति

ISRO का ट्विटर और फेसबुक पेज हिट हो गया। लाखों फॉलोअर हैं। लाइव अपडेट प्रदान करें। क्या नेट वर्थ? ISRO एक सरकारी कंपनी नहीं है। राज्य बजट 10,000 करोड़ से अधिक है।

युवा सोशल मीडिया से आकर्षित लॉन्च पर लाखों लाइक्स मिले। फेलियर भी सपोर्ट करता है। ISRO का ब्रांड मूल्य अधिक है।

नेट वर्थ और बजट

ISRO का वार्षिक बजट बढ़ रहा है। 2025 में १३ हजार करोड़ 2026 में अतिरिक्त भारत में स्पेस इंडस्ट्री में पांचवां स्थान।

नेट वर्थ अर्थात धन की शक्ति है। ISRO कम खर्च में अधिक काम करता है। Mangalyaan मात्र 500 करोड़ रुपये में। NASA से दस गुना महंगा

Skyroot जैसी निजी कंपनियां सामने आ रही हैं। ISRO प्रमुख होगा।

DRDO-ISRO संबंध मजबूत

DRDO ने अध्ययन बनाया। ISRO ने शुरू किया। दोनों मिलकर काम करते हैं। अधिक रक्षा सैटेलाइट बनेंगे।

फेलियर से जानें। अगला मिशन बेहतरीन था।

पाठक, आपका क्या विचार है?

फेलियर दुखी होगा। लेकिन ISRO विजेता है। भारत अंतरिक्ष में आगे बढ़ेगा। चंद्रयान-4 और शुक्रयान योजना।

PSLV-C62 अंततः असफल हो गया। अन्वेषा नहीं है। लेकिन आशा रहती है। ISRO वापस आ जाएगा। जय भारत!